हकलबेरी फिन के रोमांचक कारनामे
ISBN 987-93-800280-2-6
Author Mark Twain
Illustrator Naresh Kumar
Adaptor Roland Mann

हकलबेरी फिन के रोमांचक कारनामे

उस समय भाग जाने का विचार बड़ा ही अच्छा लगा था...

विधवा श्रीमती डगलस हकलबेरी फिन को सभ्य बनाने का भरसक प्रयत्न करने में लगी थीं, पर कुछ परिणाम हाथ नहीं आ रहा था। कुछ ही दिनों बाद साफ कपडे़ पहनना, रोज़ स्कूल जाना और घर आकर गर्मा-गर्म भोजन करना हकलबेरी फिन को बड़ा उबाऊ और नीरस लगने लगा।

इसलिए जीवन में कुछ रोमांच पैदा करने के लिए हक ने टॅाम सॅायर की चोरों की टोली में शामिल होने की ठान ली। पर जब अपहरण और लूट-पाट की बड़ी-बड़ी बातों के बावजूद वह टोली कुछ खास नहीं कर पाई, तो हक सोचने लगा कि रोमांच को एक तरफ करके एक और बार सभ्य बनने का प्रयत्न करना चाहिए। वह स्कूल जाने लगा और अपने काम से काम रखने लगा... कुछ समय के लिए!

फिर अचानक उसका लापता, पियक्कड़ पिता न जाने कहां से आ पहुंचा और उसके जीवन में परेशानियां खड़ी करने लग गया। उसकी पिटाई से बचने के लिए हक भाग खड़ा हुआ और नाव में बैठ कर एक सुनसान टापू पर जा पहुंचा। वहां पहुचंते ही उसे एहसास हुआ कि वह टापू पर अकेला नहीं रह रहा है। वहां उसकी मुलाकात हुई भगोड़े गुलाम जिम से जो उसका मित्र बन गया। और फिर वे दोनों निकल पड़े एक ऐसी रोमांचक यात्रा पर जिसमें उनका सामना हुआ बाढ़ से, लुटेरों से, दो दग़ाबाज़ ठगों से, गोलियों की बौछारों से, पुश्तैनी जंग से एवं और भी कई दिल दहलाने वाले हादसों से।

इतनी सारी रोमांचक और थका देने वाली घटनाओं से गुज़रने के बाद आखिरकार हक का मन हुआ कि काश वह अपने घर पर रात का भोजन करने के बाद बिस्तर पर आराम से लेटा होता। पर क्या उसकी यह इच्छा पूरी हुई या रोमांचक घटनाओं का क्रम चलता रहा?
Price
$5.00 USD
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