गांधीः मेरा जीवन ही मेरा संदेश
ISBN 978-93-81182-12-3
Author Jason Quinn
Adaptor Ashok Chakradhar
Illustrator Sachin Nagar

गांधीः मेरा जीवन ही मेरा संदेश

कैसे एक शर्मीले, मितभाषी, विनम्र वकील ने स्वयं को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे नेता के रूप में तब्दील कर लिया कि जिधर उनके दो पैर चल पड़े, करोड़ों पैर उसी ओर चल पड़े? संसार के लिए रास्ता बन गया।

दौलत, महत्वाकांक्षा और आराम का त्याग करने की एक मिसाल बन गए गांधी। भारत के जिस शोषित पीिड़त जन को आज़ाद कराना था उस जैसे ही सामान्य बन गए गांधी। कारावास भोगा, कठिनाइयां झेलीं, निरादर का सामना किया, लेकिन क्रोधित होकर ऊंची आवाज में कभी नहीं बोले गांधी। मोहनदास करमचंद गांधी! ब्रिटिश साम्राज्य की ताकत के सामने प्रेम और अहिंसा के संदेश से लैस, जिन्हें दुनिया ने कहा महात्मा गांधी!

महात्मा के पीछे हमने खोजा एक इंसान। समंदर किनारे पोरबंदर नामक शहर में 1869 में उनके जन्म से लेकर, आज़ादी के कुछ महीने बाद जनवरी 1948 में एक हत्यारे द्वारा उनके शरीर का दुखद अंत किए जाने तक खोजा।

इस खोज-यात्रा का शीर्षक है-- गांधीः ‘मेरा जीवन ही मेरा संदेश’
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$16.99 USD
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